2019 चुनाव की तैयारी, क्या बड़े फेरबदल से चौंकाएंगे मोदी!

लंबे इंतजार के बाद मोदी सरकार रविवार को कैबिनेट में बदलाव करने जा रही है। वैसे तो मंत्रियों का चुनाव प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार होता है। लेकिन राजनीतिक लोकतंत्र में सत्ताधारी पार्टी या कहें पार्टियों का इसमें दखल होता है और आम लोगों की दिलचस्पी। इस बार खास दिलचस्पी की वजह ये है कि ये फेरबदल, एक तरीके से मोदी सरकार के तीन साल का सेल्फ अप्रेजल भी होगा। इसमें पता लगेगा कि सरकार को किन क्षेत्रों में कमजोरी दिख रही है और कप्तान मोदी चुनाव से पहले, आखिरी ओवरों में तेजी से रन बटोरने के लिए किन बल्लेबाजों पर जिम्मेदारी डालेंगे। और दिलचस्पी इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि सस्पेंस ज्यादा है।

रविवार को खत्म हो जाएगा मोदी कैबिनेट में तीसरे फेरबदल का सस्पेंस, पता चल जाएगा कि राज्यों के विधानसभा चुनावों की लीग बीजेपी किनके भरोसे खेलेगी और 2019 के फाइनल में टीम मोदी किन खिलाड़ियों के साथ उतर रही है। अब दो साल से भी कम वक्त बचा है। ऐसे में मोदी सरकार तेजी से काम करना चाहेगी। कुछ ही दिन पहले सरकार ने फैसला किया था कि नई योजनाएं लाने की बजाए, पहले शुरू की जा चुकी योजनाओं से रिजल्ट देने पर जोर होगा।

माना जा रहा है कि मंत्रियों को हटाने में प्रधानमंत्री ने सबसे बड़ा आधार परफॉर्मेंस को बनाया है। बाकायदा रिपोर्ट कार्ड बनाकर मंत्रियों की छुट्टी की जा रही है, प्रोमोशन और डिमोशन किया जाएगा। साथ ही हाल में एनडीए में शामिल हुए दलों को भी मंत्रीपद दिए जाएंगे। लेकिन पहले की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री मोदी ने सारे पत्ते छुपा रखे हैं। कयास तो लग रहे हैं। मगर कौन आएगा किसी को नहीं पता और जिसकी छुट्टी हो रही है वो चुपचाप रास्ता ले रहे हैं। विपक्ष का तेवर रखनेवाली सहयोगी शिवसेना और दूसरी पार्टियां इस पूरी एक्सरसाइज को संदेह से देख रही हैं।

Read More: MODI’S BIGGEST MOVE IS A TOTAL BUST

सवाल उठता है कि 2019 की तैयारी के हिसाब से कैबिनेट फेरबदल में जाति और क्षेत्र की राजनीति की तरफ ज्यादा झुकाव होगा या अच्छे परफॉर्मेंस की तरफ? रक्षा मंत्रालय का जिम्मा किसे मिलेगा, इस्तीफा देकर फैसले का इंतजार कर रहे सुरेश प्रभु का क्या होगा? जैसी चर्चा है उसके मुताबिक क्या रेल मंत्रालय को सड़क और शिपिंग मंत्रालय के साथ मिलाकर नितिन गडकरी के हवाले किया जाएगा? क्या कोई बड़ा सरप्राइज देंगे कैप्टन मोदी?

6 thoughts on “2019 चुनाव की तैयारी, क्या बड़े फेरबदल से चौंकाएंगे मोदी!”

  1. मंगलवार को मुंबई मे हुई बारिश ने 12 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। अब इस बारिश से हुए नुकसान का अनुमान लगया जा रहा है। इंश्योरेंस इंडस्ट्री का कहना है कि 500 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है जो 2005 के सैलाब से बहुत कम है।

  2. सड़क बनाने के अपने ही लक्ष्य को पूरा करने में नाकाम सरकार ने अब एक नया फॉर्मूला निकाल लिया है। टारगेट मापने के तरीके को बदल दिया गया है। सीएनबीसी-आवाज़ को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक अब कितनी सड़क बनी इसका पैमाना अब सड़क लंबाई नहीं ब्लकि लेन या उसकी चौड़ाई भी होगी। सरकार चुनाव से पहले रिपोर्ट कार्ड सुधारने की कवायद में लगी हुई है। नए फॉर्मूले से सड़क बनाने का रिकॉर्ड होगा बेहतर।

  3. बता दें कि पुराने टारगेट को पूरा करने में सरकार फेल रही है। 2016-17 में 15000 किमी सड़क बनाने का लक्ष्य था। सरकार की तरफ से हर दिन 41 किमी सड़क निर्माण का दावा था लेकिन सिर्फ 23 किमी प्रति दिन का लक्ष्य ही हासिल हुआ। अब तक सिर्फ 8,200 किमी सड़क ही बन पाई है। अब सड़क की लंबाई नहीं बल्कि चौड़ाई भी देखी जाएगी जिससे पिछले साल का रिकॉर्ड 23 किमी प्रतिदिन के बजाय 57 किमी प्रतिदिन हो जाएगा।

  4. सरकार बनते ही सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दावा किया था कि उनकी सरकार हर दिन 41 किमी सड़क का निर्माण करेगी। यह दावा महत्वपूर्ण इसलिए था क्योंकि सरकार देश में हाइवेज को मौजूदा 1 लाख 15 हजार किमी से बढ़ा कर 2 लाख किलोमिटर करना चाहती है। लेकिन सरकार बनने के 3 साल बाद हम अबतक हम सिर्फ 23 किमी प्रतिदिन के लक्ष्य तक पहुंच पाए हैं। अब सरकार ने सड़क की सिर्फ लंबाई ही नहीं बल्कि चौड़ाई भी देखी जाएगी। यानी जितने लेन की सड़क सड़क की लंबाई का उतने से गुणा कर देना। मसलन अगर 100 किमी की चार लेन वाली सड़क बनी है तो उसे 400 किमी माना जाएगा। इस नए तरीके को लेकर नीति आयोग से भी बातचीत हो रही है।

  5. सरकार ने 2016-17 में 15000 किमी सड़क बनाने का लक्ष्य रखा था लेकिन इनमे सिर्फ 8,200 किमी सड़क ही बना पायी। जानकारों की माने तो भूमि अधिग्रहण, कानूनी पचड़े और फैसले लेने में देरी की वजह से मुश्किल हो रही है।

  6. नए फार्मूले से सड़क बनाने के रिकॉर्ड काफी बेहतर हो जाएगा और सिर्फ पिछले साल का रिकॉर्ड 23 किमी प्रतिदिन के बजाय 57 किमी प्रतिदिन हो जाएगा। अगले आम चुनावों से पहले सरकार अपना रिपोर्ट कार्ड दुरुस्त करना चाहती है। अगर लक्ष्य पूरा ना हो सके तो उसे मापने का तरीका ही बदल दो। लेकिन क्या सिर्फ आकड़े बदलने से जमीन पर हालात बदलेंगे!

Leave a Comment

60 views
Share via
Copy link